Monday, June 1, 2009

ज़िंदगी को बहुत प्यार हमने किया (एक लघु नाटक) - भाग 2

(तीसरा दृश्य - एक महिला रो रही है दहाड़े मार कर,यमराज और चित्रिगुप्ता वहाँ पहुँचते है।)

यमराज- ये कहाँ आ गये हम,यूँ ही साथ साथ चलते?

चित्रिगुप्ता - हे महाराज! सुन रहे है ये रोने की आवाज़। कल एक मनुष्य यमलोक आया था,बहुत आँसू बहाया था।किसी लाचार सा दिखायी देता था वो,अपनी जवान बीवी की दुहाई देता था वो। ये उसी की बीवी है,अब आगे देखिये।

(एक लड़के का प्रवेश,जो उस रोती महिला के इर्द गिर्द चक्कर लगाने लगता है)

लड़का - हाय डार्लिंग! फ़ोन तेरा औफ़ था,गूगल टौक पे तू औफ़लाईन थी,इसलिये मिलने चला आया। पर यहाँ आके देखता हूँ तेरे रोने का नज़ारा,अब क्या गम है जब मिल गया पति से छुटकारा।

लड़की - हाय,हाय,हाय,यमराज आये,मेरी भी जान लेके जाये। दौलत क्या खाक छोड़ी,उल्टा सर पे कर्ज़ आ गया है,खुद तो डूबा,मुझे भी डूबा गया है,मेरे पति ने तो समाज कल्याण मे अपना जीवन बिताया,इसलिये कभी माल नही कमाया,अब तो तू ही बचा ले,मेरी ज़िम्मेदारी उठा ले।

लड़का - मुन्नाभाई के शब्दों मे कहूँ तो मेरा हृदय परिवर्तन हो गया है,धर्म जाग गया है,अधर्मी सो गया है, अगर इतना नेक,इतना महान था तेरा पति,तो हे नारी,हो तू भी उसके साथ मे सती।

(यमराज और चित्रिगुप्ता ये सारा नज़ारा देखते है,और )

यमराज - हाय रे इंसान के बेशरमी,हर रूप मे मौजूद है अधर्मी।

चित्रिगुप्ता - हे यमराज,ऐसा नही है महाराज। आपको ले चलती हूँ वहाँ,जहाँ सुबह खूबसूरत,शाम हसीन है,जहाँ ज़िंदगी बेहद रंगीन है। वो है पास के बी आई टी मेसरा का पी एम सी एरीया !!

(पाठको को बता दूँ, हमारे कौलेज मे पी एम सी वो जगह है जहाँ से नो-एंट्री ज़ोन शुरु होता है,इसके पार एक दूसरी दुनिया बसी है,जहाँ हमारे कौलेज कि कन्यायें वास करती है)

(चौथा दृश्य - एक लड़का पी एम सी पर लड़कियाँ ताड़ रहा है,और रह रहके आपत्तिजनक टिप्पणियाँ भी कर रहा है,ऐसे मे यमराज और चित्रिगुप्ता {अदृश्य रूप मे} वहाँ आते है,तभी लड़के का फ़ोन बजता है)

लड़का - हाँ माँ! हाँ प्रणाम! पढ़ाई लिखाई,पढ़ाई लिखाई मे तो डूबा रहता है इस कदर मन मेरा, कि अब तो समर्पित है इसी को जीवन मेरा। आजकल ईंस्टीचियूट के चक्कर लगा रहा हूँ,डिस्पले ऐंड इन्टरफ़ेसिंग पे एक प्रोजेक्ट बना रहा हूँ।

यमराज - कहीं धर्म के नाम पर लूट है तो कोई माँ को कहता झूठ है। क्या सोचा था और क्या पाया,इंसान का असल रूप आज सामने आया।

(तभी एक फ़टे चिथड़े कपड़े पहनी औरत लड़खड़ाती हुई प्रवेश करती है,वो गिरती है और ये लड़का दौड़के उनके पास जाता है और सहारा देता है)

औरत - मैं तो जन्म जनमांतर की भोगी हूँ,मेरे करीब ना आओ मैं एक कुष्ठ रोगी हूँ।
लड़का - गरीबो लाचारों से दूर जाना तो एक नादानी है,मैं आपकी मदद करूँगा,कयोंकि यही फ़ितरते इंसानी है।

यमराज - अरे ये तो लेटेस्ट news है,अब तो यमराज भी confuse है।

चित्रिगुप्ता - हे यमराज,अगर आप ना हो नारज़,तो एक बात बताती हूँ,इन सबका सार समझाती हूँ।
(अभिनय के द्वारा ये ज़ाहिर होता है कि चित्रिगुप्ता यमराज को कुछ समझाती है)

यमराज - समझ गया। कुछ झूठे है,कुछ बे ईमान है,पर इंसान का इंसान से प्रेम इन सबसे महान है। हर इंसान मे कुछ बुराई है,कुछ अच्छाई है,पर यही जीवन की सच्चाई है। काश इस सुंदर दुनिया को हम और सँवार सकते,इंसानो को मारने के बजाय इनके अंदर की बुराई को मार सकते।

चित्रिगुप्ता - मुझे तो यकीन है कि एक रोज़,ये अपने अंदर की बुराई को ज़रूर मारेंगे।

यमराज - तो मेरा भी वादा है चित्रिगुप्ता,उस रोज़ हम धरती पे स्वर्ग को उतारेंगे,स्वर्ग को उतारेंगे ...

- - - समाप्त - - -

13 comments:

Harkirat Haqeer said...

काव्यात्मक लहजे में मनोरंजनात्मक नाटक.....!!

यह आज के समय की मांग थी जिसे आपके प्रयास ने पूरा किया ....बहुत-बहुत बधाई ....!!

अभिषेक ओझा said...

पी एम सी : पिया मिलन चौक तो नहीं ?
हा हा ! कॉलेज के दिन याद आगे जी बस !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

शिक्षाप्रधान व्यंग्यविघा का
यह नाटक मन को भा गया।
बधाई।

RAJNISH PARIHAR said...

मजाक मजाक में काफी गंभीर बात कह गए आप....!वैसे सच भी यही है....नाटक के रूप में आपने सच्चाई को ही बयान किया है..!अच्छी रचना के लिए धन्यवाद....

Pyaasa Sajal said...

Harkirat mam...ur words mean a lot to me..is utsaahvardhan ke liye dhero shukriyaa

Abhishek Ji...ye to aapne sahi kaha,par mujhe andaaza nahi tha ki P.M.C ka full form itna prasidhh hai :)

Roopchandra Sir..aap jaise seniors se sarahna paana ek bahut khaas baat hai

PD said...

bahut badhiya.. shandar..

aaj hi last tino post padhe hain.. aaj kal phursat nahi mil raha hai, so der ho gayi..

MUFLIS said...

आज के परिवेश का
सुन्दर चित्रण ....
मनोरंजन भी ,,,
ज्ञान भी ,,,
उत्साह भी .
ढेरों बधाई

---मुफलिस---

vandana said...

bahut hi badiya natak hai ..kavita ka roop liye hue ye natak bahut hi sunder laga ...sacchaye ko itni sunderta se bayan kiya hai ...bahut khoob

Babli said...

पहले तो मैं आपका तहे दिल से शुक्रियादा करना चाहती हूँ कि आपको मेरी शायरी पसंद आई!
वाह वाह क्या बात है! बेहतरीन पोस्ट के लिए बधाई! बहुत बढ़िया लगा! लिखते रहिये!

Pyaasa Sajal said...

shukriya dosto... :)

ABHISHEK SiM said...

mein orissa sey hoon. toh advanced hindi samajhne mein thodi takliff hai. blog ka naam hi dekh ke ghabrah gaya tha... :) so didn't visit for the first time.

nice that you aren't baised towards any language but i read predominantly ur english posts.

@50 first post: congratz on that 50! u must be a good number theorist! for u really seem to love counting...

@kya hindi aisi bola jaati hai: roflmao!!

@A visit to the paradise: "statistical irony" - kya mast bola! loved ur honest one-liners...
is nostalgia - like happiness - contagious?

@Mera Pehla Pehla Pyar: kya baat hai! mein toh kuch aaur hi sooch raha tha..

Glad to meet you. I dunno if u use the email-Id, u gave me. So thot to add that I wrote an email too.

p.s.: blogrolled!

Pyaasa Sajal said...

Abhishek...welcome to the blog bro...hope u keep visiting the blog...

कुश said...

मस्त लिखा है.. तुकबंदी भी कमाल है और सन्देश भी... पिया मिलन चौक तो बढ़िया होगा ही.. :)